पीए एक डेंजर प्राणी है, जानिए क्यों मुख्यमंत्री शिवराज को भी लगता है डर?

उज्जैन में भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपने विधायकों से कहा है कि पीए यानी सहायक सचिव एक डेंजर प्राणी है इससे बचना है।

भोपाल (जोशहोश डेस्क) मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निजी स्टाफ को लेकर मंत्रियों के बाद अब विधायकों को बड़ी नसीहत दी है। उज्जैन में भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने अपने विधायकों से कहा है कि पीए यानी निजी सचिव एक डेंजर प्राणी है इससे बचना है।

मुख्यमंत्री शिवराज ने इससे पहले कोलार रेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में अपने मंत्रियों भी निजी स्टाफ को लेकर नसीहत दी थी। तब उन्होंने फिल्म नायक में अभिनेता परेश रावल द्वारा निभाए किरदार मिस्टर बंसल का हवाला दिया था। जो फिल्म में मुख्यमंत्री के निजी सहायक थे।

मंत्रियों और विधायकों को अपने निजी स्टाफ को लेकर मिल रही नसीहत का कारण बेहद साफ है। सूबे की सियासत में पहले भी कई मंत्री और विधायक अपने निजी स्टाफ के कारण चर्चाओं में रहे थे। यहां तक पीए नाम के प्राणियों के कारण कई बार तो मंत्रियों की कुर्सी तक जा चुकी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के निजी सचिव रहे प्रेमचंद प्रसाद का नाम तक व्यापमं घोटाले की एसटीएफ जांच में आया था। बाद में प्रेमचंद प्रसाद को कोर्ट से जमानत मिली थी मुख्यमंत्री शिवराज के निज सचिव का घोटाले में नाम आना बड़ी सियासी हलचल थी।

जोशहोश मीडिया आपको मंत्रियों के निजी स्टाफ के कुछ ऐसे नामों और उनके कारनामों से वाकिफ करा रहा है जिन्होंने सूबे की सियासत में तूफान उठा दिया था-

धनराज यादव- पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव के ओएसडी

पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव के ओएसडी धनराज यादव का नाम व्यापमं के भर्ती घोटाले में आने पर सियासी तूफान खड़ा हो गया था। धनराज यादव को एसटीएफ ने अरेस्ट कर जेल भेज दिया था। यहां तक कि तत्कालीन राज्यपाल रामनरेश यादव तक पर केस दर्ज किया था हालांकि हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।

पुस्तक राजनीतिनामा के मुताबिक राज्यपाल के ओएसडी धनराज यादव ने बेइमानी के धंधे में ईमानदारी बरतने का सिद्धांत कायम रखा। एसटीएफ को जांच के बाद पता चला कि ग्वालियर के एक लड़के से पुलिस में सिपाही बनने के लिए धनराज ने पांच लाख रुपए लिए थे। व्यापमं की लिखित परीक्षा में उसे पास भी करा दिया लेकिन जब उस ललड़के का फिजिकल में सिलेक्शन नहीं हुआ तब उसके पैसे लौटा दिए।

ओपी शुक्ला – पूर्व जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के ओएसडी

प्रदेश के पूर्व जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के ओएसडी ओपी शुक्ला को भी व्यापमं कांड में जेल तक जाना पड़ा था मध्यप्रदेश की सियासत में या यूं कहें कि शिवराज सरकार में सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाले व्यापमं घोटाले में तत्कालीन जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा तक जेल की हवा खा चुके हैं। ओपी शुक्ला की गिरफ्तारी के बाद भी शिवराज सिंह चौहान ने अपने मंत्रियों को हिदायत दी थी कि मंत्री निजी पदस्थापना में ओएसडी, पीएस और पीए की नोटिंग की गई फाइल को ध्यान से पढ़ें तभी उस पर हस्ताक्षर करें।

वीरेंद्र पांडे और निर्मल अवस्थी- नरोत्तम मिश्रा के पीए और ओएसडी

साल 2019 में भाजपा के दिग्गज नेता और वर्तमान गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी अपने पीए और ओएसडी के कारण चचिर्त हुए थे। बहुचर्चित ई टेंडरिंग घोटाले में नरोत्तम मिश्रा के पीए वीरेंद्र पांडे और ओएसडी निर्मल अवस्थी को EOW ने हिरासत में लिया था।

वीरेंद्र पांडे और ओएसडी निर्मल अवस्थी पर जल संसाधन विभाग के टेंडर्स में गड़बड़ी कर गुजरात और हैदराबाद की कंपनियों को टेंडर दिलाने का आरोप है।नरोत्तम मिश्रा उस समय जल संसाधन मंत्री थे।

दिलीपराज द्विवेदी- मंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व पीए

व्यापमं के परिवहन आरक्षक घोटाले में तत्कालीन परिवहन मंत्री जगदीश देवड़ा के निज सहायक दिलीपराज द्विवेदी का नाम भी सामने आया था। दिलीपराज पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के नजदीकी थे।

केमेस्टी के असिस्टेंट प्रोफेसर दिलीपराज लम्बे समय तक परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर रहे।आय से अधिक आय के मामले में दिलीपराज पर केस भी चला।

मयंक श्रोती- पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला के निज सहायक

पूर्व मंत्री राजेंद्र शुल्जा के निज सहायक मयंक श्रोती उस समय चर्चाओं में आए थे जब लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रिश्वत लेते रंगें हाथों पकड़ा था मयंक श्रोती ऊर्जा विभाग में अटैच वाहनों के अनुबंध रिन्यू करने के एवज में एक टैवल्स संचालक से पचार हजार रुपए मांग रहे थे। लोकायुक्त पुलिस की भनक लगने पर श्रोती तब चार इमली स्थिति राजेंद्र शुक्ला के सरकारी निवास में छिप गए थे। बड़ी मशक्कत के बाद उन्हें निकाला जा सका था।

बाद में मामले को यह कहकर निपटाया गया कि मंत्री राजेंद्र शुक्ल का श्रोती से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि वे मंत्री स्टाफ में सरकार के पिछले कार्यकाल में थे।

मंत्री के पीए ने ली थी संघ के स्वयंसेवक से रिश्वत

13 अप्रैल 2011 को तत्कालीन नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री मनोहर उंटवाल के निज सहायक उस समय सुर्खियों में आए थे जब मंत्री से मिलने आए आरएसएस के स्वयं सेवक की संदिग्ध मौत हो गई थी। रमेश पाठक नाम के स्वयंसेवक का मंत्री के पीए से दो लाख के लेन देन का मामला था। पाठक और पीए दोनों बंगले में मुलाकात के बाद भोपाल टाॅकीज स्थित बैंक पहुंचे थे यहां पाठक ने जहर खा लिया था जिससे उनकी जान चली गई थी

जमुना देवी के स्टाफ के अधिकारी ने लीक किया अविश्वास प्रस्ताव

साल 2008 में नेता प्रतिपक्ष सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थीं। चुनावी साल मेें इसका बहुत महत्व था।अचानक जमुनादेवी ने सरकार के बजाय विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी के खिलाफ प्रस्ताव लाने की घोषणा कर दी। इसके पीछे बड़ा कारण जमुना देवी के स्टाफ के अधिकारी थे, जिन्होंने पूरे अविश्वास प्रस्ताव का मजमून सीएम सचिवालय के एक आईएएस को बता दिया। ये अधिकारी दिग्विजय सिंह के करीबी रहे थे और बाद में शिवराज सरकार में भी मलाईदार पद पर भी काबिज रहे।

मंत्री पुत्र के विवाह के लिए कलेक्टर को फोन


बाबूलाल गौर की सरकार में दिलीप भटेरे राजस्व मंत्री थे। उनके पुत्र के विवाह का रिसेप्शन भोपाल में हुआ था। इस आयोजन के लिए ‘मदद’ करने उनके स्टाफ के दो कर्मचारियों ने सीधे भोपाल कलेक्टर को ही फोन लगा दिया था। तत्कालीन कलेक्टर संजय शुक्ला ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से कर दी। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर दोनों कर्मचारियों को मंत्री कार्यालय से हटा दिया गया था।

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