मध्यप्रदेश के किस गांव की पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान ने राज्यसभा में दी मिसाल ?

गुरुवार को पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान ने मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बाचा गांव का सदन में उल्लेख किया।

भोपाल (जोशहोश डेस्क) बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में मध्यप्रदेश के एक गांव की मिसाल दी गई। गुरुवार को पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान ( Dharmendra Pradhan) ने मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बाचा गांव का सदन में उल्लेख किया। बाचा गांव की मिसाल देते हुए पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने देश के ग्रामीण परिवेश की बदलती तस्वीर को बयां किया। आइए जानते हैं क्या खास है मध्यप्रदेश के बाचा गांव में…

बैतूल जिले के घोडाडोंगरी ब्लाॅक की खदारा पंचायत का छोटा सा गांव बाचा आत्मनिर्भर भारत की बानगी है। अनुसूचित जनजाति बाहुल्य बाचा गांव में करीब 74 मकान हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पंचायती राज की कल्पना के अनुरूप इस गांव को पूरी तरह से आदर्श ग्राम बनाया गया है।

यहां के लोग बिजली पानी और रोज़गार जैसी किसी भी चीज के लिए शहरों पर आश्रित नहीं हैं।इस गांव में खाना पकाने से लेकर अन्य सभी ज़रूरतों के लिए 100 फीसदी सोलर एनर्जी का इस्तेमाल हो रहा है। यानी यहां पर चूल्हे पर भोजन बनाने के साथ घरों में उजाला भी सौर उर्जा से ही होता है। इसलिए इसे सोलर गांव भी कहा जाता है।

बाचा गांव के सोलर विलेज की शुरुआत साल 2018 में हुई थी।जिले के भारत भारती शिक्षा संस्थान ने तब आईआईटी मुम्बई और ओएनजीसी को बाचा को सोलर विलेज बनाने एक प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव को मंजूरी ममिली और देखते देखते केवल 10 महीनों में ही ये देश का पहला सोलर विलेज बन गया। अब बाचा गांव वाटर विलेज बनने की और अग्रसर है।

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पानी के मामले में भी बाचा गांव आत्मनिर्भर है। यह संभव हुआ वर्षा जल संरक्षण से। ग्रामीणों ने हर घर में बाड़ी में सोखता गड्ढे खोदे और छतों से आने वाला बारिश का पानी जमीन के भीतर पहुंचाया। बीते कुछ सालों से ग्रामीण गांव के आसपास की नदी और नालों में बोरी बंधान करके भी बड़ी मात्रा में जल संरक्षण करते रहे हैं। कई जल संरचनाएं भी ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से श्रमदान करके बनाई हैं। यही कारण है कि क्षेत्र का जलस्तर खासा बढ़ चुका है। पानी की कहीं कोई कमी नहीं ।

बाचा गांव के निवासी साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन को लेकर भी बेहद जागरूक हैं। गांव के घर-घर में राखी डस्टबीन इसकी गवाह है। सोलर एनर्जी की वजह से बाचा गांव 100 फीसदी प्रदूषण मुक्त भी हो गया है।

सब्जियों केलिए बनाये अन्नपूर्णा मंडपम

गांव के लोगों ने सब्जियों की जरुरत को पूरा करने के लिए अपने घर के पीछे ही अन्नपूर्णा मंडपम बनाए हैं। इनमें सब्जियां लगाई जाती हैं साथ ही घरों में बचे पानी का सदुपयोग भी हो जाता है। इनसे ग्रामीणों को स्वयं की जरूरत के लिए पर्याप्त सब्जियां मिल जाती है। अन्नपूर्णा मंडपम के कारण ही लॉकडाउन में भी गांव के लोगों को खान-पान की जरूरतों के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ी।

फिल्म फेस्टिवल में दिखाई उपलब्धियां

बाचा गांव कीउपलब्धियों और नवाचारों को लेकर डॉक्यूमेंट्री ‘बाचाः द राइजिंग विलेज’ भी बन चुकी है। इसका प्रदर्शन 5 वें अंतरराष्ट्रीय विज्ञान फिल्म फेस्टिवल में भी किया जा चुका है।
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