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क्या प्रायोजित था PM की सुरक्षा पर भाजपाई मुख्यमंत्रियों का ‘उतावलापन’

भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा प्रधानमंत्री की सुरक्षा को मुददा बनाने को यूपी के घटनाक्रम से जोड़ा जा रहा है।

नई दिल्ली (जोशहोश डेस्क) एक न्यूज चैनल के स्टिंग के बाद बुधवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत अन्य भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए जाने पर ही सवाल उठ रहे हैं। बुधवार शाम से मीडिया में अचानक एक के बाद एक भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा प्रधानमंत्री की सुरक्षा को मुददा बनाने को यूपी के घटनाक्रम से जोड़ा जा रहा है। साथ ही इसे मुख्यमंत्रियों द्वारा अपनी कुर्सी बचाने व नंबर बढ़ाने का उतावलापन तक बताया जा रहा है।

पंजाब की घटना को लेकर यह स्टिंग मंगलवार को प्रसारित हुआ था। स्टिंग में सीआईडी के डीएसपी सुखदेव सिंह यह कहते नजर आ रहे थे कि उन्होंने अपने अधिकारियों को सूचित कर दिया था कि पीएम की रैली के दौरान किसान प्रदर्शन कर सकते हैं। पंजाब के अखबार पहले ही किसान जत्थेबंदियों द्व्रारा प्रधानमंत्री के दौरे का विरोध करने की घोषणा किये जाने का समाचार प्रकाशित कर चुके थे इसलिए इस स्टिंग के बाद कोई बड़ी सिसासी हलचल नहीं देखी गई।

स्टिंग के कई घंटों बाद बुधवार शाम अचानक भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री इस स्टिंग को लेकर पंजाब सरकार और कांग्रेस पर सवाल उठाने लगे। बड़ी बात यह है कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा, असम, उत्तराखंड और हिमाचल के भाजपाई मुख्यमंत्री सभी बुधवार शाम ही मीडिया के सामने आए जबकि ये सभी मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक पर चल रहे विवाद में पहले ही अपने बयान दे चुके थे बल्कि शिवराज तो पीएम की सुरक्षा के लिए धार्मिक अनुष्ठान भी कर चुके थे।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार शाम को मंत्रालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि उस दिन जो हमने कहा था, वह सिद्ध हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया गया है, इसका एक टीवी चैनल ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा किया है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि सुरक्षा में हुई चूक कोई संयोग नहीं, साजिश थी, षड्यंत्र था।

स्टिंग और इस पर भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों के अचानक मुखर होने से पहले यूपी में बड़े घटनाक्रम के तहत योगी सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और तीन अन्य विधायक भाजपा छोड़ चुके थे और सुप्रीम कोर्ट भी बुधवार को ही मामले की जांच के लिए पूर्व जस्टिस इंदू मल्होत्रा के नेतृत्व में कमेटी बना चुका था। ऐसे में यह माना जा रहा है कि यूपी के घटनाक्रम से ध्यान हटाने ही एक के बाद एक भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा को मुद्दा बनाया था।

भाजपाई मुख्यमंत्रियों के अचानक मुखर होने पर सवाल भी उठे। मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने भी पंजाब की घटना पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच कमेटी बनाए जाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की बयानबाजी को अनावश्यक बताया-

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा पर चूक को लेकर चल रहा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट जांच के लिए समिति गठित करने के आदेश दिए थे। पूर्व जस्टिस इंदू मल्होत्रा के नेतृत्व में समिति इस पूरे मामले की जांच करेगी। बीते 5 जनवरी को फिरोजपुर जाते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला एक फ्लाईओवर पर 15-20 मिनट तक फंसा रहा था। प्रदर्शनकारियों द्वारा रास्ता रोकने के बाद पीएम मोदी के काफिले को वापस लौटना पड़ा था।

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