Blog

सिर पर सवार कांग्रेस का भूत, झूठ की बैशाखी के भरोसे PM मोदी

वरिष्ठ पत्रकार राकेश अचल की कलम से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री के जवाब का विश्लेषण।

भूत तो भूत होता है,अगर भूत किसी के सर पर सवार हो जाए तो उसे उतारना आसान काम नहीं है। भूत आदमी का भी हो सकता है और किसी दल का भी। मुझे लगता है कि देश में बकौल भाजपा मर चुकी कांग्रेस भूत बन चुकी है और आजकल भाजपा के आम कार्यकर्ता से लेकर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सिर तक पर सवार होकर उन्हें परेशान किये हुए है। सिर पर सवार भूत से बहके माननीय को अब खुलकर झूठ की बैशाखी लगाना पड़ रही है।

बचपन में मै भी भूतों से बहुत डरता था,लेकिन अब मुझे भूतों से डर नहीं लगता क्योंकि मैंने कभी किसी भूत को अपने सिर पर सवार नहीं होने दिया,लेकिन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने शायद कांग्रेस के भूत को अपने सिर पर चढ़ने की इजाजत दे दी है। संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दो घंटे के उत्तर में प्रधानमंत्री जी ने डेढ़ घंटा कांग्रेस पर खर्च किये। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई बहस और उसके बाद प्रधानमंत्री का जबाब हमेशा रोचक होता है लेकिन इस बार ये समय रोचक ही नहीं रोमांचक भी रहा। टीवी चैनलों पर पूरे देश ने और यूट्यूब के जरिये पूरी दुनिया ने देखा कि प्रधानमंत्री के सिर पर सवार कांग्रेस का भूत कैसे माननीय से गागरोनी गवा रहा था।

प्रधानमंत्री अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने और प्रतिपक्ष के आरोपों का प्रतिवाद करने के बजाय कांग्रेस और उसके पुरखों पर आरोप लगाने में भिड़ गए, जैसे राष्ट्रपति का अभिभाषण कांग्रेस ने बनाया हो और प्रधानमंत्री इसके लिए कांग्रेस की बखिया उधेड़ रहे हों ? सचमुच संसद के इस सत्र में कांग्रेस ने सरकार की जमकर बखिया उधेड़ी। जब भी किसी की बखिया उधेड़ी जाती है तो दाएं-बाएं से भीतर की हकीकत झाँकने लगती है। मरी हुई कांग्रेस की इसी कामयाबी से पूरी भाजपा और प्रधानमंत्री जी दुखी नजर आये। वे चाहकर भी अपने सिरों पर सवार कांग्रेस के भूत को उतार नहीं पा रहे हैं।

राकेश अचल

एक तरफ कांग्रेस भाजपा और प्रधानमंत्री जी की नजर में मर चुकी है। एक के बाद एक राज्य में उसे ठुकराया जा चुका है और दूसरी तरफ वे उसी मरी हुई कांग्रेस के प्रहारों से आतंकित भी हैं। वे अपनी हर नाकामी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा देते हैं,यहां तक कि कोरोनाकाल में महानगरों से मजदूरों के पलायन के लिए भी माननीय ने कांग्रेस के भूत को ही दोषी ठहरा दिया। गनीमत है कि उन्होंने इसमें सिनेमा अभिनेता सोनू सूद का नाम नहीं लिया। सोनू ने भी बेबस मजदूरों को उनके घरों तक पहुँचाने के लिए उस समय बसों की व्यवस्था के अलावा रेल टिकिटों का इंतजाम किया था।

कोरोनाकाल में असंख्य लोग भय और भूख के कारण पैदल अपने घरों को जाने के लिए विवश थे, सरकार ने हाथ खड़े कर दिए थे, ऐसे में जिसने भी मजदूरों की मदद की वे सब राष्ट्रद्रोही हो गए, फिर चाहे वे सोनू सूद जैसे लोग हों या कांग्रेस जैसे राजनीतिक दल .मजे की बात तो ये है कि सरकार को अपनी नाकामी छिपाने के लिए संसद में झूठ की बैशाखियाँ लगना पड़ रहीं हैं। पहले सरकार ने संसद में कहा था कि देश में कोरोनाकाल में आक्सीजन की कमी से कोई नहीं मरा और अब कहा कि सरकार के पास कोरोनाकाल में नदियों में शवों को बहाये जाने की कोई सूचना नहीं है।

दरअसल कांग्रेस के भूत ने सरकार की मति हर ली है। भूत जब किसी की मति हर लेता है तो पीड़ित व्यक्ति हो या सरकार अंट -शंट बकने लगती है। सरकार संसद में ये कहने तक से नहीं चूकती कि उसे किसान आंदोलन के दौरान मारे गए किसी किसान की जानकारी नहीं है। सरकार टीवी नहीं देखती। सरकार अखबार नहीं पढ़ती। यानि सरकार एक तरह से जड़ हो चुकी है। स्थितिप्रज्ञ हो चुकी है। उसे देश में क्या हो रहा है, इसकी कोई खबर नहीं हैं.पिछले दो साल में सरकार ने संसद में कितनी बार झूठ बोला है ये पूरा देश जानता है। सरकार के इस झूठ को लेकर अनेक सांसदों ने विशेषाधिकार की अपीलें तक लगा रखीं हैं किन्तु पीठासीन अधिकारी भी सरकार के पिठ्ठू की तरह आचरण कर रहे हैं।

देश में किसी को ये मानने में कोई हिचक नहीं है कि बीते सात साल में देश में कांग्रेस ने अपना जनाधार खोया है। संगठन के स्तर पर भी कांग्रेस रन-बन की हो चुकी है। कांग्रेस में नेतृत्व का संकट है। यानि कांग्रेस या तो मर चुकी है या फिर अधमरी है, इसके बावजूद सत्तारूढ़ दल किसी और राजनीतिक दल को अपने लिए खतरा या चुनौती मानने के बजाय कांग्रेस से ही आतंकित है। भाजपा के निशाने पर न समाजवादी हैं और न वामपंथी। न बहुजन समाज पार्टी है और न कोई और,उसे सोते-जाँगते कांग्रेस का ही भूत सता रहा है। इसीलिए सरकार की सारी ऊर्जा कांग्रेस को कोसने में खर्च हो रही है। सरकार नहीं जानती कि- कौओं के कोसने से कभी कोई ढोर नहीं मरता।

मुझे अब लगने लगा है कि कांग्रेस चाहे अपनी मौत मर भी जाती लेकिन भाजपा उसे मरने नहीं देगी, क्योंकि एक भाजपा ही है जो अपनी हर नाकामी के लिए दोषी ठहरने के लिए जीवित रहे हुए है। उसे कोई दूसरा दिखाई ही नहीं देता। न आगे और न पीछे। इसलिए मजबूरी में भाजपा कांग्रेस के निर्जीव पुतले से जूझ रही है लेकिन ये जो पब्लिक ही वो सब जानती है। उसे पता चल चुका है कि सरकार की नाकामियों के लिए अतीत का कोई नेता नहीं बल्कि वर्तमान की सरकार और उसके बहुरूपिया नेता जिम्मेदार हैं।

कांग्रेस के भूत से परेशान भाजपा और भाजपा की सरकारों के प्रति मेरी पूरी सहानुभूति है। प्रेत बाधाओं से पीड़ित व्यक्ति और संस्थाओं के प्रति सहानुभूति रखना ही चाहिए। प्रेत बाधाओं से पीड़ित लोगों के झूठ पर भी कभी हंसना नहीं चाहिए ,क्योंकि उसका हर झूठ ,हर व्यवहार अस्वाभाविक होता है। अब भाजपा के सिर पर चढ़े भूत को कोई ओझा,गुनिया या तांत्रिक नहीं बल्कि जनता ही उतार सकती है। जब तक भाजपा के सिर से कांग्रेस का भूत नहीं उतरता तब तक सरकार सही ढंग से काम नहीं कर सकती। सरकार और पार्टी की सारी ऊर्जा तो कांग्रेस के भूत से जूझने में ही नष्ट हो जाती है।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस कहीं भी मुकाबले में नहीं है लेकिन कांग्रेस का भूत सभी राज्यों में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा रहा है। जैसे चोर की दाढ़ी में तिनका होता है वैसे ही इन दिनों भाजपा नेताओं के सिर पर कांग्रेस का भूत सवार है। ये भूत भय का भूत है। सरकार को निर्भय होकर देश की सेवा करना चाहिए। लोकतंत्र में भूत तभी बाधक बन पाते हैं जब वर्तमान कमजोर हो। इसलिए अपने भीतर झांको भैया। बाहर का हाल बहुत बुरा है। सचमुच बुरा है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Back to top button