Blog

महामृत्युंजय जप-मशाल जुलूस, क्या इससे डर जाएगी कोरोना की सुरसा ?

पत्रकार राकेश अचल का लगातार बढ़ते कोरोना केस और पीएम की सुरक्षा पर विवाद के सन्दर्भ में आलेख।

हनुमान जी मंदिर में हैं या जंगल में पता नहीं,क्योंकि कोरोना की सुरसा अपना बदन लगातार बढ़ाती जा रही है। सुरसा ने अब एक दिन में एक लाख लोगों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है लेकिन हमारे मामा शिवराज सिंह चौहान और उनकी पार्टी केवल एक आदमी के लिए महा मृत्युंजय जप कर रही है,मशाल जुलूस निकाल रही है। कोरोना की सुरसा ,क्या इससे डर जाएगी?

सरकारों और वैज्ञानिकों की तमाम और बार-बार की चेतावनी के बावजूद प्रधानमंत्री से लेकर पार्षद चुनावी रैलियां करने से बाज नहीं आ रहे। भले ही कुर्सियां खाली पड़ीं हो,पानी बरस रहा हो लेकिन रैली में जाना है और फिर सुरक्षा में चूक का आरोप लगाना है,लेकिन सुरसा को मुंह फाड़ने से नहीं रोकना। एक तरफ प्रशासन आम आदमी पर मास्क न पहनने पर पांच-पांच सौ रूपये का जुर्माना ठोंक रहा है वहीं दूसरी तरफ नेतानगरी के लोग बिना मास्क के वो सब कर रहे हाँ जिससे सुरसा खुश होती है।

भारत में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी बढ़ रहे हैं। गुरुवार को भारत में कुल 90,928 नए मामले सामने आए। यह आंकड़ा नए साल के शुरुआती 6 दिनों में ही करीब चार गुना तक बढ़त का संकेत दे रहा है। ये मामले सबसे अधिक देश के महानगरों दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में दर्ज किए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सुबह आठ बजे जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में गुरुवार को ओमिक्रोन वैरिएंट के एक दिन में सर्वाधिक 495 मामले सामने आए। देश में नए वैरिएंट के कुल मामले 2,630 हो गए हैं।

राकेश अचल

फकीरचंद की सुरक्षा में चूक की जाँच के लिए दल बन गया है लेकिन आमजन की सुरक्षा में सेंध लगाने की घटनाओं की जांच के लिए कोई दल-बल नहीं है। सब जानते हैं कि समरथ को दोष नहीं दिया जा सकता.सबको पता है कि कोरोना को देश में कौन फैला रहा है? जनता तो बाबली ठहरी,वो तो अनुशासनहीन है ही लेकिन सरकार उससे ज्यादा अनुशासनहीनता कर रही है। उद्घाटन,शिलान्यास,रैलियों के बिना उसे चैन ही नहीं आ रहा और अब तो इसमें मशाल जुलूस और महा मृत्युंजय यज्ञ भी शामिल हो गए हैं।

हमारे पुरखे कहते थे कि जप-तप चुपचाप किये जाने वाले कृत्य हैं। इन्हें कैमरों के सामने,ढोल बजाकर नहीं किया जाता,कटआउट तो बिलकुल नहीं लगाए जा सकते,लेकिन कौन सुनता है बुजुर्गों की। जिनकी सरकार है उनके हाथ कौन पकड़ सकता है? मामा के एक इशारे पर सूबे के तमाम शिवालयों में ‘ ॐ त्रयंबकम ‘ का जप गूँज उठा। भगवान भोलेनाथ परेशान,आखिर हुआ क्या ? वे हैरान थे की अवाम को बचाने के लिए कोई गुहार नहीं लेकिन एक आदमी के लिए जिसे कुछ हुआ ही नहीं सब ॐ-ॐ करने में लगे हैं।

हमारी दादी कहती थीं कि जब महा मृत्युंजय की जरूरत तब पड़ती है जब किसी रोगी पर दवाएं असर करना बंद कर देतीं है। उदाहरण के लिए जैसे ग्वालियर की राजमाता को इसकी जरूरत थी,अटल जी को थी लेकिन मोदी जी को तो बिलकुल नहीं हैं। वे बीमार हैं ही नहीं, हाँ उन्हें बकौल सत्यपाल मालिक अहमन्यता की बीमारी जरूर है किन्तु उसका उपचार महामृत्यंजय मन्त्र से नहीं होता .उसका उपचार तो जनता ही कर सकती है और जहाँ उसे मौक़ा मिलता है करती है।

बहरहाल हम बात कर रहे थे कोरोना की सुरसा की। कोरोना की सुरसा के सामने आज दुर्भाग्य से कोई हनुमान नहीं है,इसलिए दुनिया में दूसरी बार-हाहाकार सुनाई देने लगा है। अमेरिका में दस लाख लोग कोरोना की सुरसा की चपेट में आ चुके हैं। अब इनमें से कितनों को सुरसा छोड़ेगी और कितनों को अपने साथ ले जाएगी कहा नहीं जा सकता।

अमेरिका की छोड़िये तो हमारे देश की जनता एक भयभीत प्रधानमंत्री के होते हुए भी कोरोना से नहीं डर रही। उसे आंकड़े नहीं डराते। फर्जी आंकड़ों से आजिज जनता को लगता ही नहीं की मौत एक बार फिर से अपना तांडव दिखने के लिए मैदान में है। इससे में सभी को एहतियातन अपने घरों में कैद हो जाना चाहिए, नेताओं को इस मौत के मुंह में जाना हैं तो शौक से जाएँ, लेकिन उनकी वजह से कम से कम आप तो अपनी जिंदगी से खिलवाड़ न करें।

अगर आप यकीन करें तो महाराष्ट्र में गुरुवार को 36 हजार से ज्यादा और दिल्ली में 15 हजार से ज्यादा नए मामले मिले। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, कर्नाटक समेत अन्य राज्यों में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आज एक दिन में ओमिक्रोन वैरिएंट के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बीते 24 घंटे में कोरोना के कुल 90 हजार 928 मामले सामने आए और 325 लोगों की मौत हो गई। इससे एक दिन पहले 58 हजार 097 मामले सामने आए थे। देश में एक्टिव केस की संख्या बढ़कर दो लाख 85 हजार 401 हो गई है। मरने वालों की कुल संख्या चार लाख 82 हजार 876 हो गई है। कुल अब तक तीन करोड़ 51 लाख नौ हजार 286 मामले सामने आ गए हैं। हर राज्य में कमोवेश यही स्थिति है .इन आंकड़ों को देखकर भी क्या आपको नहीं लगता कि आपकी जिंदगी खतरे में है और महा मृत्युंजय मन्त्र जाप की जरूरत फकीरचंद के मुकाबले आपको ज्यादा है ?

आज जरूरत इस बात की है कि कोरोना की सुरसा से निबटने के लिए नेतागिरी फौरन बंद कर दी जाये। सरकार चाहे तो देश में स्वास्थ्य आपातकाल लगा दे तमाम निजी स्वास्थ्य सेवाओं को अपने नियंत्रण में ले ले, दवाओं के उत्पादन,मूल्य निर्धारण और वितरण पर अपना नियंत्रण कर ले,आक्सीजन,वेंटिलेटर का इंतजाम सम्हाल ले .चुनाव तो अपने तरीके से हो जायेंगे। वैसे भी सरकार पराजय के भय से पांच राज्यों में चुनाव टालने के बहाने खोज ही रही है। कोरोना की तीसरी लहर से बेहतर बहाना क्या हो सकता है ? सांप भी मर जाये और लाठी भी सलामत रहे।

अमेरिका में रह रहे परिजनों ने खबर दी है कि यहां हर दिन 10 लाख से ज्यादा कोविड-19 के मरीज निकलने और अस्पतालों में बिस्तर न मिलने के चलते हड़कंप की स्थिति है। इस बीच, राहत की बात यह थी कि आईसीयू में रोगियों की संख्या कम देखी गई।अमेरिकी यूनिवर्सिटी ऑफ मेरिलैंड में महामारी मामलों के प्रमुख डॉक्टर डॉ फहीम का कहना है कि ओमिक्रॉन को हल्के में न लें, मास्क पहने, कोरोना टीके की बूस्टर खुराक लें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। डॉ फहीम योनुस के अस्पताल में ही 100 फीसदी मरीज वेंटिलेटर का इस्तेमाल कर रहे हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Back to top button