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गद्दार-दिवस: लोकतंत्र बचाओ सप्ताह में ‘शिव सरकार’ को एक्सपोज़ करेगी कांग्रेस

कांग्रेस आगामी 23 से 29 मार्च तक मनाएगी ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’

भोपाल (जोशहोश डेस्क) मध्यप्रदेश के राजनैतिक इतिहास में 20 मार्च का दिन अहम है। तीन साल पहले 20 मार्च को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित सरकार को अपदस्थ कर लोकतंत्र की हत्या का दिन बताते हुए सोमवार को ‘गद्दार दिवस’ मनाया।

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आज ही के दिन 2020 को मध्यप्रदेश के राजनैतिक इतिहास में दूसरी बार काला अध्याय जोड़ा गया था, 1967 में पंडित द्वारका प्रसाद मिश्र के बाद 2020 में कतिपय बिकाऊ गद्दारों का सहयोग लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित सरकार को अपदस्थ कर लोकतंत्र की हत्या का इतिहास रचा था।

केके मिश्रा ने कहा कि प्रदेश की इन असहनीय स्थितियों को लेकर कांग्रेस आगामी 23 से 29 मार्च तक ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ मनाएगी। प्रतिदिन पार्टी के वरिष्ठ नेता जिलों/ शहरों में प्रेस वार्ताएं लेकर शिवराज सरकार की जनविरोधी नीतियों, झूठी घोषणाओं, कभी न पूरे होने वाले शिलान्यासों के फरेब से आमजन को अवगत करायेगी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मानना है कि इस लोकतांत्रिक दुष्कर्म के दुष्कर्मियों को राजनैतिक फांसी देने का समय अब वर्ष-2023 में आ गया है। प्रदेश की शिवराज सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हो चुकी है। युवाओं और बेरोजगारों को सिर पर लाठी मारती, लाडली बहनों की साड़ी खींचती, दलितों को जंजीरों में बांधती, आदिवासियों को जमीनों में गाढ़ती, पिछड़ों के आरक्षण के प्रतिवेदनों को फाड़ती, विभिन्न किस्म के माफियाओं की करती हुई आरती शिवराज सरकार की भ्रष्ट योजनाओं तथा अनैतिक राजनैतिक चरित्र का पर्दाफाश हो चुका है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हालात यह बन चुके हैं कि सत्ता के नशे और ‘मद्य प्रदेश’ में यदि अपने वाजिब हकों को लेकर कोई आवाज़ उठती है, यदि वह आवाज किसानों की है तो उनके शव बिछा दिए जाते हैं, यदि दलित की है तो उनके शव, यदि आदिवासी की तो उनके शव, लाडली बहना है तो उनके साथ बलात्कार/ गैंगरेप के बाद उनके शव और बेरोजगारों के शव तो फेसबुक लाइव करके बिछा दिए जाते हैं! ऐसा प्रतीत होता है कि ‘मद्य प्रदेश में शवराज काबिज है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मद्य प्रदेश में ‘आर्थिक आपातकाल’ लग चुका है, प्रदेश 3.80 लाख करोड़ के कर्ज बोझ के तले दब चुका है यानि प्रदेश में पैदा होने वाला हर बच्चा 50 हजार रु. कर्ज का बोझ लेकर अपना जन्म ले रहा है! राज्य सरकार ने महज 55 दिनों में 20 हजार करोड़ का कर्ज लिया, सिर्फ 2023 में हीं सात मर्तबा कर्ज लिया, पिछले सप्ताह ही 3000 करोड़ का कर्ज लिया, अब फिर 2000 करोड़ का कर्ज ले रही हैं। बावजूद इसके हमारे घोषणावीर मुख्यमंत्री जी घोषणाएं ऐसी कर रहे हैं जैसे कुबेर का खजाना इनकी ही जेब में है! कर्ज बोझ की इन गंभीर परि स्थितियों को देखते हुए यह कहना प्रासंगिक होगा कि ‘घर में नहीं हैं दाने-मामा चले भुनाने।’’ कांग्रेस ने प्रदेश की आर्थिक बदहाली और कर्ज की लांघती हुई सीमा पर राज्य सरकार से ‘श्वेत-पत्र’ जारी करने की मांग भी की।

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