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सहमति या मजबूरी: सचिन बिरला का दलबदल और 15 करोड़ की अटकल!

कांग्रेस विधायक सचिन बिरला के भाजपा में शामिल होने को लेकर 15 करोड़ रुपए की भी चर्चा चल पड़ी है।

भोपाल (जोशहोश डेस्क) प्रदेश में एक लोकसभा और तीन विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के युवा विधायक सचिन बिरला का पाला बदलना सुर्खियों में है। जिस खंडवा सीट पर लोकसभा चुनाव होना है उसके तहत आने वाली बड़वाह विधानसभा सीट के कांग्रेस विधायक सचिन बिरला भाजपा में क्यों शामिल हुए इसे लेकर कई चर्चाएं चल रही हैं। इनमें अब एक चर्चा 15 करोड़ रुपए की भी चल पड़ी है।

प्रदेश के सांध्यकालीन अखबार दैनिक अग्निबाण के संपादक रवींद्र जैन ने अपने साप्ताहिक कॉलम सुनी सुनाई मेंं भी इसका जिक्र किया है। रवींद्र जैन ने अपने कॉलम में सचिन बिरला के पाला बदलने को सहमति या मजबूरी हेडिंग के साथ लिखा है।

कॉलम में सोशल मीडिया में चल रही चर्चाओं के हवाले से लिखा गया है कि सचिन बिरला पेशे से बिल्डर हैं। उनकी बनाई कई कॉलोनियों में अनियमितताओं को लेकर सरकार ने शिकंजा कस दिया था। चर्चा इस बात की भी है कि इन कॉलोनियों पर 15 करोड़ की रिकवरी निकाली गई थी। हालांकि इसके प्रमाण सामने नहीं आए हैं।

दूसरी ओर सचिन बिरला स्वयं अपने दलबदल के पीछे क्षेत्र के विकास को सबसे बड़ा कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र के विकास के लिए ही वे कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए हैं।

वहीं बड़वाह में एक ओर सचिन बिरला को दगाबाज कह उनका विरोध किया जा रहा है और पुतले जलाये जा रहे हैं। वहीं सचिन बिरला के समर्थकों का भाजपा में शामिल होना प्रांरभ हो गया है। मंत्री जगदीश देवड़ा के समक्ष मंगलवार को कांग्रेस के कई कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हुए-

सचिन बिरला के पाला बदलने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के भी अपने-अपने तर्क हैं। भाजपा ने इसे विकास के लिए उठाया कदम बताया है तो कांग्रेस का कहना है कि सचिन ने अपने भविष्य की आहूति दे दी है।

इन तर्को के बीच खंडवा लोकसभा सीट पर सचिन बिरला के पाला बदलने से सियासी समीकरण किसके पक्ष में होंगे इसकी पहली तस्वीर तो खंडवा का चुनाव नतीजा ही बताएगा। वहीं बड़वाह की जनता सचिन बिरला के इस कदम के साथ है या नहीं? इसके लिए बड़वाह में आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव का इंतज़ार करना होगा।

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