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न सरकारी सुरक्षित न निजी, जबलपुर में अस्पताल खाक-8 की मौत

जबलपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से 8 लोगों की मौत, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका

जबलपुर (जोशहोश डेस्क) सरकारी हो या निजी, मध्यप्रदेश के अस्पतालों में मरीज़ों की सुरक्षा भगवान् भरोसे है। बीते साल भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल में लगी आग के बाद अब जबलपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से 8 लोगों की मौत होने की खबर है। मृतकों की संख्या बढ़ने की भी आशंका है।

हादसा जबलपुर के विजय नगर स्थित न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में हुआ। अस्पताल में सोमवार दोपहर आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में अस्पताल की तीन मंज़िला बिल्डिंग ख़ाक हो गई। आग की चपेट में आए 8 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

मृतकों में 4 लोग अस्पताल स्टाफ हैं इनमें दो नर्सों के भी शामिल होने की खबर है। हादसे के समय अस्पताल में करीब 40 लोगों के मौजूद होने की बात सामने आ रही है। घायलों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।

हादसे के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने हादसे पर अफसोस जताया। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए और गंभीर घायलों के लिए 50-50 हजार रुपए की मदद की घोषणा भी की है।

प्राथमिक जांच में घटना का कारण शार्ट सर्किट सामने आ रहा है। इसके कारण ही जनरेटर से भड़की आग ने पूरी चपेट में ले लिया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ आग की लपटें इतनी भीषण थी कि लोगों को सम्भलने का मौका ही नहीं मिल पाया और वे अस्पताल में ही जिंदा जल गए।

गौरतलब है कि बीते साल राजधानी के कमला नेहरू अस्पताल के SNCU में आग से 4 नवजात ज़िंदा जल गए थे। तब यह बात सामने आई थी कि 15 साल से अस्पताल ने फायर एनओसी लेना तक जरूरी नहीं समझा था। तब यह सवाल उठा था कि अगर इतने लंबे समय तक अस्पताल ने फायर एनओसी नहीं ली तो इसका जिम्मेदार कौन है? क्या राजधानी के अस्पताल की सुध लेना भी सरकार के लिए जरूरी नहीं था?

इस अग्निकांड के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव मनीष सिंह ने निर्देश दिए थे कि प्रदेश के हर अस्पताल को 30 नवंबर 2021 तक फायर ऑडिट कराना होगा लेकिन यह ऑडिट कितना हुआ और कितना सफल रहा इसकी कलई जबलपुर में हुए इस हादसे से खुल गई।

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