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भाजपा नेता की चूक से लीक हुई ‘टूलकिट’, पार्टी अध्यक्ष से था कनेक्शन

नई दिल्ली (जोशहोश डेस्क) टूलकिट मामले में दिशा रवि और अन्य लोगों की गिरफ्तारी के बाद यह शब्द सबकी जुबान पर चढ़ गया था। जहां एक तरफ पुलिस टूलकिट को संदिग्ध बता रही थी तो वहीं दूसरी और एक बड़ा वर्ग कह रहा है कि यह बस आंदोलन को चलाने का एक हिस्सा है।

अब ट्विटर पर टूलकिट शब्द मशहूर हो चुका है। हाल ही में कोटा के भाजपा जिला अध्यक्ष ने एक डॉक फाइल अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर की है। इसको लेकर वे ट्रोल होने लगे हैं। लोग उनके ट्वीट पर जवाब देते हुए लिख रहे हैं कि उन्होंने गलती से टूलकिट शेयर कर दी। इस डॉक फाइल में जेपी नड्डा के जयपुर आने पर ट्विटर पर चलाए जाने वाले अभियान के बारे में पोस्ट लिखी हुई हैं और एक हैशटैग दिया गया है। हालांकि ट्रोल होने के बाद उन्होंने यह ट्वीट डिलीट कर दिया है।

क्या होती है टूलकिट                

कुछ दिनों पहले ग्रेटा थनबर्ग ने किसान आंदोलन के समर्थन में एक ट्वीट किया था। इसके साथ ही उन्होंने एक गूगल डॉक्युमेंट भी शेयर किया था, जिसे टूलकिट कहा गया। इस टूलकिट में किसान आंदोलन को लेकर एक्शन प्लान का जिक्र था। इस डॉक्युमेंट को लेकर आईटी मिनिस्ट्री ने ट्विटर से कहा था कि इससे पता चलता है कि भारत से बाहर किसान आंदोलन को लेकर भ्रम फैलाने की रणनीति तैयार हुई थी। लेकिन आपको बता दें कि अक्सर ऐसे डॉक्युमेंट का उपयोग आंदोलन या कैंपेन को ऑनलाइन या ऑफलाइन चलाने की प्लानिंग बनाने के लिए किया जाता है।

जब इंटरनेट नहीं था तो तब आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए आंदोलनकारी डायरी में प्लानिंग करते थे। इसमें इसका जिक्र होता था कि कहां जमा होंगे, क्या नारे लगाएंगे, किस बात को प्रमुखता से रखा जाएगा आदि। इंटरनेट आने के बाद गूगल डॉक पर प्लानिंग शुरू हुई। अपनी बात को लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का भी बहुत उपयोग किया जाने लगा। ट्विटर पर हैशटैग प्रमुख माना जाता है। इसे ट्रेंड कराने के लिए एक ही समय में उस हैशटैग में ज्यादा से ज्यादा ट्वीट होने चाहिए, तब वह हैशटैग ट्रेंडिंग में आता है। इसके लिए डॉक फाइल तैयार की जाती है। उसमें हैशटैग दिया जाता है। वक्त बताया जाता है और इसके साथ ही क्या ट्वीट करना है यह भी बता दिया जाता है। इससे एक ही समय में लाखों लोग ट्वीट करते हैं और ट्विटर पर वह हैशटैग ट्रेंड कर जाता है। इसका उपयोग आंदोलनकारी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक पार्टियां, बड़ी कंपनियां और सामाजिक समूह भी करते हैं।

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