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पद्मश्री बंसी कौल का निधन, सूना हुआ भोपाल का ‘रंग विदूषक’

देश के प्रख्यात रंगकर्मी और भोपाल की नाट्य संस्था 'रंग विदूषक' के संस्थापक बंसी कौल का शनिवार को निधन हो गया।

भोपाल (जोशहोश डेस्क) देश के प्रख्यात रंगकर्मी और भोपाल की नाट्य संस्था ‘रंग विदूषक’ के संस्थापक बंसी कौल (Bansi Kaul ) का शनिवार को निधन हो गया। 71 वर्षीय बंसी कौल लंबे वक्त से बीमार थे। उनका निधन का दिल्ली स्थित द्वारका में उनके निज निवास पर हुआ हुआ। पद्मश्री बंसी कौल के निधन से भोपाल में उनके द्वारा स्थापित नाट्य संस्था ‘रंग विदूषक’ के साथ पूरे कला जगत में शोक की लहर छा गई। उनका अंतिम संस्कार रविवार को दिल्ली के लोधी रोड विश्राम घाट पर किया जायेगा।

बंसी कौल नवंबर 2020 से वो अस्वस्थ चल रहे थे। हाल ही में उनका कैंसर का ऑपरेशन हुआ था। बंसी कौल का जन्म जम्मू और कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में 23 अगस्त 1949 को हुआ था। वे एक मशहूर थिएटर आर्टिस्ट, डायरेक्टर और एक डिजाइनर भी थे। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD)से स्नातक रहे बंसी कौल ने भोपाल में रंग विदूषक के नाम से अपनी संस्था बनाई और देश-दुनिया में अपनी नाट्य शैली की वजह से अलग पहचान बनाई।

बंसी कौल की संस्था रंग विदूषक ड्रामा थिएटर ने विभिन्न शैलियों में करीब 80 से ज्यादा नाटक तैयार किए हैं। उन्हें 2014 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

कला के क्षेत्र में योगदान के लिए, बंसी कौल को 2016 में कालिदास सम्मान से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी से भी नवाजा गया। बंसी कौल का सबसे मशहूर प्रदर्शन कवि-संत कबीर की संग्रहित कृतियों पर आधारित ‘केहन कबीर’ है। जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय कालिदास सम्मान से सम्मानित किया गया था।

बंशी कौल की नाट्य संस्था ‘रंग विदूषक’ ने उज्जैन, चैन्नई, बैंगलोर, शोलापुर, ग्वालियर, इन्दौर, महेश्वर, रायगढ़ और दिल्ली समेत कई शहरों में समय-समय पर रंग शिविर का आयोजन किया। गांव की चौपालों, महल और हवेलियों के आंगन, नदी के घाटों और रेगिस्तान में रेत के टीलों पर ‘रंग विदूषक’ द्रारा मंचित नाटक लम्बे समय तक कलाप्रेमियों की स्मृतियों में रहेंगे।

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