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पेगासस: संघ के पूर्व विचारक गोविंदाचार्य फिर SC पहुंचे, ‘अवैध निगरानी’ पर FIR की मांग

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व विचारक KN गोविंदाचार्य भी पेगासस मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

नई दिल्ली (जोशहोश डेस्क) पेगासस जासूसी कांड को लेकर केंद्र सरकार लगातार घिरती नजर आ रही है। विपक्ष के अलावा सरकार के सहयोगी नीतीश कुमार भी पेगासस मामले की जांच की मांग उठा चुके हैं। अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व विचारक KN गोविंदाचार्य भी इस मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। गोविंदाचार्य ने अपनी दो साल पुरानी याचिका को पुनर्जीवित किये जाने के साथ ही अवैध निगरानी केस में एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है।

संघ के पूर्व विचारक गोविंदाचार्य ने ‘अवैध निगरानी’ में शामिल फेसबुक, व्हाट्सएप, एनएसओ ग्रुप और अन्य के खिलाफ अदालत की निगरानी में जांच और प्राथमिकी दर्ज किये जाने की मांग की है। । सुप्रीम कोर्ट से गोविंदाचार्य ने अपनी 2019 की याचिका को पुनर्जीवित करने के लिए कहा है।

गोविंदाचार्य ने 2019 में सुप्रीम कोर्ट एक याचिका दाखिल की थी। इसमें गोविंदाचार्य ने व्हाट्सएप के उस खुलासे पर कार्यवाही की मांग की थी जिसमें व्हाट्सएप ने यह कहा था कि कई भारतीय नागरिकों के मोबाइल फोन पेगासस स्पाईवेयर के माध्यम से हैक किए जा रहे हैं। गोविंदाचार्य ने इस कांड की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA ) से जांच कराने की मांग की थी। अब गोविंदाचार्य ने मामले को फिर से शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि जब पेगासस जासूसी के आरोप सामने आए तो उनकी पहली याचिका को पुनर्जीवित किया जाये।

गोविंदाचार्य ने पेगासस स्पाइवेयर की कोर्ट की निगरानी में जांच और फेसबुक, व्हाट्सएप, एनएसओ ग्रुप और ‘अवैध निगरानी’ में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। गोविंदाचार्य ने कहा कि पेगासस निगरानी साइबर आतंकवाद की तरह है और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दंडनीय भी है। उन्होंने कहा कि इसमें शामिल संस्थाओं को नागरिकों की गोपनीयता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन करने के लिए बुक किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुवाई वाली एक पीठ पेगासस जासूसी कांड से सम्बंधित 10 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें वरिष्ठ पत्रकार एन. राम और शशि कुमार द्वारा दायर एक याचिका भी शामिल है, जो अदालत से यह निर्देश देने की मांग कर रहे हैं कि केंद्र को इस पर सफाई देने का निर्देश दिया जाए।

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