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धर्म का अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं : मद्रास हाईकोर्ट

नई दिल्ली (जोशहोश डेस्क) मद्रास हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर याचिकाकर्ता से कहा कि धार्मिक आयोजनों में विज्ञान की मदद लें। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति तमिलनाडू के त्रिची के श्रीरंगम मंदिर में आयोजित होने वाले पारंपरिक उत्सव से संबंधित एक जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई कर रहे थे।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि – धर्म का अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता है। सुनवाई कर रहे चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वह देखें कि क्या लोगों के स्वास्थ्य और कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लंघन किए बिना उत्सव कराया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि क्या कोरोना प्रोटोकॉल पर समझौता किए बिना और मंदिर में बाहरी लोगों को प्रवेश की अनुमति दिए बिना उत्सव आयोजित करना संभव है।

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याचिका दायर करने वाले रंगराजन नरसिम्हन ने हाईकोर्ट से कहा है कि वे अप्रैल 2020 से श्रीरंगम के रंगनाथस्वामी मंदिर में उत्सव और अनुष्ठानों के आयोजन पर रोक से आहत हैं। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा है कि – आपके धार्मिक संस्कारों को सार्वजनकि हित और जीवन के अधिकार के अधीन होना चाहिए। धर्म का अधिकार जीवन के अधिकार से बड़ा नहीं है। यदि सरकार ने महामारी से निपटने के लिए कुछ कदम उठाए हैं तो हम उसमें दखल की कोशिश नहीं करेंगे।

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